ब्लॉग

संपादकीय: मधु किश्वर के सवाल और सत्ता-मीडिया की रहस्यमयी चुप्पी

लोकतंत्र में असहमति की आवाज चाहे बाहर से आए या भीतर से, वह व्यवस्था को आईना दिखाने का काम करती है। लेकिन जब यह आवाज किसी ऐसे व्यक्तित्व की हो जो दशकों तक एक विचारधारा और एक राजनीतिक दल के सबसे मुखर समर्थकों में गिना जाता रहा हो, तो उसकी गूंज और भी गहरी हो जाती है।

हाल के दिनों में सामाजिक कार्यकर्ता मधु किश्वर ने भारतीय जनता पार्टी के आंतरिक तंत्र, उसके डिजिटल इकोसिस्टम और मुख्यधारा के मीडिया के साथ सत्ता की कथित ‘जुगलबंदी’ को लेकर जो गंभीर आरोप लगाए हैं, वे किसी भी स्वस्थ


Discover more from In Breaking

Subscribe to get the latest posts sent to your email.