कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के गहन परीक्षण के बाद जारी की गई अंतिम सूची में उच्च न्यायालय के पूर्व जज का नाम वोटर लिस्ट से काटे जाने के बाद राज्य में हुई SIR पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
पूर्व जस्टिस शाहिदुल्लाह मुंशी ने गुरुवार को जानकारी दी थी कि पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया के बाद उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है।
उन्होंने बताया कि उनके परिवार के अन्य सदस्यों (पत्नी और बड़े बेटे) का नाम फिलहाल ‘अधिनिर्णय’ (Adjudication) की
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के गहन परीक्षण के बाद जारी की गई अंतिम सूची में उच्च न्यायालय के पूर्व जज का नाम वोटर लिस्ट से काटे जाने के बाद राज्य में हुई SIR पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
पूर्व जस्टिस शाहिदुल्लाह मुंशी ने गुरुवार को जानकारी दी थी कि पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया के बाद उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है।
उन्होंने बताया कि उनके परिवार के अन्य सदस्यों (पत्नी और बड़े बेटे) का नाम फिलहाल ‘अधिनिर्णय’ (Adjudication) की श्रेणी में रखा गया है, लेकिन उनका स्वयं का नाम पूरी तरह हटा दिया गया है। जस्टिस मुंशी फिलहाल पश्चिम बंगाल वक्फ बोर्ड (Board of Auqaf) के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं।
उन्होंने मीडिया से कहा, “यह बहुत अपमानजनक और दर्दनाक है। मैंने पासपोर्ट सहित सभी आवश्यक दस्तावेज जमा किए थे। मुझे समझ नहीं आता कि न्यायिक अधिकारियों ने किस आधार पर मेरा नाम हटाने का फैसला लिया। हमें अंधेरे में रखा गया।”
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि एक जज की नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान उनके दस्तावेजों की गहन जांच (कौलेजियम और राष्ट्रपति स्तर पर) होती है, ऐसे में उनकी नागरिकता या पहचान पर संदेह करना समझ से परे है।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में हुए मतदाता सूचियों के गहन परीक्षण में करीब 13 लाख लोगों (लगभग 40%) के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। चुनाव आयोग ने इसके लिए राज्य भर में 19 अपीलीय ट्रिब्यूनल (Appellate Tribunals) बनाए हैं, जहाँ प्रभावित लोग अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
वहीँ पश्चिम बंगाल में पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल 2026 को होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इतनी बड़ी संख्या में नाम कटना एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है और चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है।
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