नई दिल्ली(इंटरनेशनल डेस्क)। ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टेंकरो की एंट्री रोके जाने पर अकेले पड़े अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने NATO के सहयोगी देशो को कायर बताया है।
दरअसल, ट्रंप इस बात से नाराज हैं कि अमेरिका के कहने के बावजूद अधिकांश नाटो देशों ने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान में शामिल होने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सुरक्षित करने के लिए अपनी नौसेना भेजने से इनकार कर दिया है।
ट्रंप ने नाटो को ‘पेपर टाइगर’ (कागजी शेर) बताते हुए कहा कि अमेरिका के बिना इस
नई दिल्ली(इंटरनेशनल डेस्क)। ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टेंकरो की एंट्री रोके जाने पर अकेले पड़े अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने NATO के सहयोगी देशो को कायर बताया है।
दरअसल, ट्रंप इस बात से नाराज हैं कि अमेरिका के कहने के बावजूद अधिकांश नाटो देशों ने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान में शामिल होने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सुरक्षित करने के लिए अपनी नौसेना भेजने से इनकार कर दिया है।
ट्रंप ने नाटो को ‘पेपर टाइगर’ (कागजी शेर) बताते हुए कहा कि अमेरिका के बिना इस संगठन की कोई हैसियत नहीं है। उन्होंने लिखा, “वे तेल की ऊंची कीमतों की शिकायत करते हैं, लेकिन इसे सस्ता करने के लिए हॉर्मुज खोलने में मदद नहीं करना चाहते। यह बहुत आसान और कम जोखिम भरा काम है।”
इससे पहले जनवरी 2026 में भी ट्रंप ने आरोप लगाया था कि अफगानिस्तान युद्ध के दौरान नाटो देशों की सेनाएं फ्रंटलाइन पर नहीं थीं और “पीछे छिपी” रहती थीं।
असल में NATO देशो में शामिल कुछ देशो ने ईरान के खिलाफ साथ देने के ट्रंप के निमंत्रण को ठुकरा दिया। फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों ने स्पष्ट किया है कि वे इस युद्ध का हिस्सा नहीं बनना चाहते।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि वे केवल तनाव कम करने (De-escalation) के लिए कूटनीतिक मदद दे सकते हैं, सैन्य नहीं। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी कहा है कि वे अपनी रक्षा करेंगे लेकिन किसी बड़े क्षेत्रीय युद्ध में नहीं खिंचेंगे।
ट्रंप की इस टिप्पणी से न केवल नाटो के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों में भी अस्थिरता आ गई है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि वे सहयोगियों के इस “धोखे” को याद रखेंगे।
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