नई दिल्ली। लोकसभा में बहुमत हासिल करने वाले सत्तारूढ़ एनडीए ने राज्य सभा में भी बहुमत हासिल कर लिया है। पिछले काफी समय से एनडीए राज्य सभा में बहुमत करने की जुगाड़ में लगा था और अब आख़िरकार एनडीए ने राज्य सभा में बहुमत जुटा लिया है।
हालांकि हाल में हुए द्विवार्षिक चुनावों में 10 राज्यों की 37 सीटों के लिए संपन्न हुई चुनाव प्रक्रिया में से अधिकांश सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। लेकिन बिहार, ओडिशा और हरियाणा की 11 सीटों पर एनडीए ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए राज्य सभा में अपने लिए
नई दिल्ली। लोकसभा में बहुमत हासिल करने वाले सत्तारूढ़ एनडीए ने राज्य सभा में भी बहुमत हासिल कर लिया है। पिछले काफी समय से एनडीए राज्य सभा में बहुमत करने की जुगाड़ में लगा था और अब आख़िरकार एनडीए ने राज्य सभा में बहुमत जुटा लिया है।
हालांकि हाल में हुए द्विवार्षिक चुनावों में 10 राज्यों की 37 सीटों के लिए संपन्न हुई चुनाव प्रक्रिया में से अधिकांश सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। लेकिन बिहार, ओडिशा और हरियाणा की 11 सीटों पर एनडीए ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए राज्य सभा में अपने लिए बहुमत सुनिश्चित कर लिया।
बिहार और ओडिशा में क्रॉस वोटिंग के चलते विपक्ष खाली हाथ रहा, हालांकि ओडिशा में बीजू जनता दल को एक सीट हाथ लगी है। बिहार में राजद (RJD) और कांग्रेस के कुछ विधायकों की अनुपस्थिति और ओडिशा में विपक्षी विधायकों द्वारा की गई क्रॉस वोटिंग ने ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की एकजुटता की कलई खोल दी है।
बहुमत से सरकार को क्या होगा फायदा:
राज्यसभा में बहुमत मिलने का मतलब है कि अब सरकार को महत्वपूर्ण बिलों (जैसे आर्थिक सुधार, न्यायपालिका से जुड़े कानून या संविधान संशोधन) को पारित कराने के लिए विपक्षी दलों या क्षेत्रीय दलों (जैसे BRS, YSRCP या BJD) पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
राज्यसभा की कुल 245 सीटों में बहुमत के लिए 123 का आंकड़ा चाहिए होता है। मनोनीत सदस्यों और हालिया जीत के बाद एनडीए का आंकड़ा 130 के पार जाने का अनुमान है, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्ष 80 के नीचे सिमटता नजर आ रहा है। इस नई शक्ति के साथ, सरकार आने वाले सत्रों में कई लंबित और साहसिक विधेयकों को पटल पर रख सकती है।
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