तमिलनाडु में क्षेत्रीय दलों के सहारे अपनी सरकार बनाने की बीजेपी की उम्मीदों को बड़ा खटका लगा है। तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके और अन्नाद्रमुक (AIADMK) के पूर्व दिग्गज नेता ओ. पनीरसेल्वम (OPS) औपचारिक रूप से सत्तारूढ़ दल द्रमुक (DMK) में शामिल हो गए।
चेन्नई में औपचारिक मिलन:
पनीरसेल्वम आज सुबह चेन्नई स्थित द्रमुक मुख्यालय ‘अन्ना अरिवालयम’ पहुँचे, जहाँ मुख्यमंत्री और द्रमुक अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने उन्हें पार्टी का अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया। उनके साथ उनके बेटे और पूर्व
तमिलनाडु में क्षेत्रीय दलों के सहारे अपनी सरकार बनाने की बीजेपी की उम्मीदों को बड़ा खटका लगा है। तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके और अन्नाद्रमुक (AIADMK) के पूर्व दिग्गज नेता ओ. पनीरसेल्वम (OPS) औपचारिक रूप से सत्तारूढ़ दल द्रमुक (DMK) में शामिल हो गए।
चेन्नई में औपचारिक मिलन:
पनीरसेल्वम आज सुबह चेन्नई स्थित द्रमुक मुख्यालय ‘अन्ना अरिवालयम’ पहुँचे, जहाँ मुख्यमंत्री और द्रमुक अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने उन्हें पार्टी का अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया। उनके साथ उनके बेटे और पूर्व सांसद पी. रवींद्रनाथ ने भी द्रमुक की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर स्टालिन ने उन्हें अपना “प्रिय भाई” बताते हुए कहा कि पनीरसेल्वम अपनी “मातृ संस्था” (द्रविड़ आंदोलन की मूल जड़) में वापस लौट आए हैं।
एदापद्दी पलानीस्वामी पर तीखा हमला:
द्रमुक में शामिल होने के तुरंत बाद पत्रकारों से बात करते हुए पनीरसेल्वम ने एआईएडीएमके प्रमुख एदापद्दी के. पलानीस्वामी (EPS) पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “ईपीएस एक तानाशाह की तरह व्यवहार कर रहे हैं। उनके अहंकार की वजह से अन्नाद्रमुक अब कभी चुनाव नहीं जीत पाएगी।” उन्होंने आगे कहा कि वह तमिलनाडु को ‘फासीवादी ताकतों’ से बचाने और द्रविड़ आंदोलन को मजबूत करने के लिए स्टालिन के नेतृत्व में एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में काम करेंगे।
राजनीतिक प्रभाव और आगामी चुनाव
2026 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले हुए इस दलबदल को द्रविड़ राजनीति का सबसे बड़ा ‘यू-टर्न’ माना जा रहा है। ओपीएस के आने से दक्षिण तमिलनाडु के ‘थेवर’ समुदाय (Mukkulathor) में द्रमुक की पकड़ और मजबूत होने की संभावना है, जो पारंपरिक रूप से अन्नाद्रमुक का वोट बैंक रहा है।
अन्नाद्रमुक की प्रतिक्रिया:
अन्नाद्रमुक नेता सी.वी. शनमुगम ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि “पार्टी आज शनि के प्रभाव (पनौती) से मुक्त हो गई है।” भाजपा ने भी ओपीएस को “कृतघ्न” और “राजनीतिक रूप से लाचार” बताया है।
यह कदम न केवल अन्नाद्रमुक के लिए एक बड़ा झटका है, बल्कि इसने आगामी चुनावों में द्रमुक के ‘द्रविड़ियन मॉडल 2.0’ को और अधिक मनोवैज्ञानिक बढ़त दे दी है।
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