पटना। बिहार में हाल ही में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Investigation Bureau) की छापेमारी में एक और ‘धनकुबेर’ इंजीनियर का पर्दाफाश हुआ है, जिसने भ्रष्टाचार के पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) के एक अधिशासी अभियंता (Executive Engineer) के ठिकानों पर हुई इस कार्रवाई ने राज्य के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
इस छापेमारी की सबसे हैरान करने वाली बात नोटों की बरामदगी का तरीका था। आय से अधिक संपत्ति के मामले में जब टीम इंजीनियर के पटना और अन्य पैतृक आवासों पर पहुंची, तो नकद
पटना। बिहार में हाल ही में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Investigation Bureau) की छापेमारी में एक और ‘धनकुबेर’ इंजीनियर का पर्दाफाश हुआ है, जिसने भ्रष्टाचार के पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) के एक अधिशासी अभियंता (Executive Engineer) के ठिकानों पर हुई इस कार्रवाई ने राज्य के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
इस छापेमारी की सबसे हैरान करने वाली बात नोटों की बरामदगी का तरीका था। आय से अधिक संपत्ति के मामले में जब टीम इंजीनियर के पटना और अन्य पैतृक आवासों पर पहुंची, तो नकद राशि इतनी अधिक थी कि उसे गिनने के लिए बैंक से मशीनें मंगवानी पड़ीं। अलमारियों, बेड के अंदर और यहां तक कि छत के फाल्स सीलिंग में भी नोटों के बंडल छिपाकर रखे गए थे। शुरुआती अनुमान के अनुसार, बरामद नकदी और जेवरात की कीमत कई करोड़ रुपये बताई जा रही है।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस इंजीनियर ने न केवल पटना में आलीशान फ्लैट और जमीनें खरीदी थीं, बल्कि दिल्ली और नोएडा जैसे शहरों में भी बेनामी संपत्तियां अर्जित की थीं।
भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी थीं कि कागजी तौर पर इंजीनियर ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर कई फर्जी कंपनियां खोल रखी थीं, जिनके जरिए सरकारी फंड का हेरफेर किया जाता था। निगरानी विभाग अब उन ठेकेदारों और बिचौलियों की कुंडली खंगाल रहा है, जो इस धन उगाही के नेटवर्क का हिस्सा थे।
बिहार सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी इंजीनियर को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने और उसकी संपत्ति को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री कार्यालय से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि “जीरो टॉलरेंस” की नीति के तहत किसी भी भ्रष्ट अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।
इस घटना ने एक बार फिर बिहार में तकनीकी विभागों के भीतर चल रहे कमीशनखोरी के खेल को उजागर कर दिया है, जिससे आम जनता के विकास के लिए आने वाला पैसा अधिकारियों की तिजोरियों में जा रहा है।
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