असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ बेंगलुरु में एफआईआर दर्ज की गई है। यह एफआईआर उनके एक विवादित सोशल मीडिया वीडियो को लेकर की गई है।
यह पूरा विवाद 7 फरवरी 2026 को असम भाजपा के आधिकारिक एक्स (ट्विटर) हैंडल से पोस्ट किए गए एक एनिमेटेड वीडियो के बाद शुरू हुआ।
वीडियो में क्या था? वीडियो में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को एक राइफल से कुछ एनिमेटेड व्यक्तियों (जो एक विशेष समुदाय की वेशभूषा में थे) पर निशाना साधते और गोली चलाते हुए दिखाया गया था।
विवादित स्लोगन: वीडियो में
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ बेंगलुरु में एफआईआर दर्ज की गई है। यह एफआईआर उनके एक विवादित सोशल मीडिया वीडियो को लेकर की गई है।
यह पूरा विवाद 7 फरवरी 2026 को असम भाजपा के आधिकारिक एक्स (ट्विटर) हैंडल से पोस्ट किए गए एक एनिमेटेड वीडियो के बाद शुरू हुआ।
वीडियो में क्या था? वीडियो में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को एक राइफल से कुछ एनिमेटेड व्यक्तियों (जो एक विशेष समुदाय की वेशभूषा में थे) पर निशाना साधते और गोली चलाते हुए दिखाया गया था।
विवादित स्लोगन: वीडियो में “पॉइंट ब्लैंक शॉट” (Point Blank Shot), “नो मर्सी” (No Mercy), “पाकिस्तान क्यों नहीं गए?” और “विदेशियों के लिए कोई माफी नहीं” जैसे भड़काऊ संदेशों का इस्तेमाल किया गया था।
कार्रवाई: भारी विरोध और आलोचना के बाद भाजपा ने इस वीडियो को डिलीट कर दिया था, लेकिन इसके स्क्रीनशॉट और क्लिप्स वायरल हो गए।
बेंगलुरु में FIR:
शिकायतकर्ता कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के पदाधिकारी रंजीत कुमार ने 8 फरवरी को बेंगलुरु में शिकायत दर्ज कराई थी।
FIR की धाराएं: बेंगलुरु पुलिस ने इस मामले में IPC की धारा 192 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना) और धारा 353(2) (नफरत फैलाने वाली सूचना प्रसारित करना) के तहत मामला दर्ज किया है।
आरोपी: FIR में मुख्यमंत्री के अलावा असम भाजपा के सोशल मीडिया हैंडल के संचालकों (विश्वजीत खाउंड और रोन बिकाश गौरव) को भी नामजद किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट का रुख (16-17 फरवरी 2026): इस मामले को लेकर विपक्षी दलों (CPI-M और CPI) ने सुप्रीम कोर्ट में भी याचिकाएं दायर की थीं, जिसमें मुख्यमंत्री के खिलाफ FIR और SIT जांच की मांग की गई थी।
कोर्ट की टिप्पणी: 16 फरवरी को चीफ जस्टिस की बेंच ने कहा कि “चुनाव आते ही सुप्रीम कोर्ट को अखाड़ा बना दिया जाता है।”
ताजा आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर सीधे सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को सलाह दी है कि वे संबंधित राज्य के हाईकोर्ट (गुवाहाटी हाईकोर्ट) का दरवाजा खटखटाएं।
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