सुप्रीम कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि याचिकाकर्ताओं को पहले गौहाटी हाईकोर्ट जाना चाहिए।
इस मामले की विस्तृत जानकारी नीचे दी गई है:
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
बेंच: मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने यह आदेश दिया।
कोर्ट की टिप्पणी: CJI ने कहा, “यह एक परेशान करने वाली प्रवृत्ति बन गई है कि हर मामला सीधे यहीं आ जाता है, वह भी चुनावों से ठीक पहले। हम हाईकोर्ट के अधिकार और प्राधिकार (Authority) को कमजोर नहीं होने देंगे।”
निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने गौहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया है कि यदि इस मामले में याचिका दायर की जाती है, तो उसकी त्वरित सुनवाई (Expeditious hearing) सुनिश्चित की जाए।
याचिका का मुख्य आधार:
यह विवाद असम भाजपा द्वारा सोशल मीडिया (X) पर साझा किए गए एक एनिमेटेड वीडियो से जुड़ा है, जिसे बाद में हटा दिया गया था।
आरोप: याचिकाकर्ताओं (जिनमें CPI, CPI(M) और अन्य संगठन शामिल हैं) का दावा है कि वीडियो में मुख्यमंत्री को एक राइफल से अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की तरह दिखने वाले किरदारों पर निशाना साधते दिखाया गया था।
मांग: वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि मुख्यमंत्री “बार-बार ऐसे अपराध” कर रहे हैं। याचिका में उनके खिलाफ FIR दर्ज करने और एक विशेष जांच दल (SIT) बनाने की मांग की गई थी।
कूटनीतिक और कानूनी मोड़
वैकल्पिक फोरम की मांग: जब कोर्ट ने हाईकोर्ट जाने को कहा, तो वकीलों ने अनुरोध किया कि मामले को असम के बाहर किसी अन्य हाईकोर्ट में भेजा जाए।
कोर्ट की नाराजगी: CJI सूर्यकांत ने इस मांग को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह हाईकोर्ट पर अविश्वास दिखाने जैसा है और बहुत ही “दुर्भाग्यपूर्ण” दलील है। उन्होंने कहा कि “सिस्टम” पर भरोसा रखें।
आगे क्या होगा?
अब याचिकाकर्ताओं को अपनी शिकायतों के साथ गौहाटी हाईकोर्ट का रुख करना होगा। चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने ‘त्वरित सुनवाई’ की बात कही है, इसलिए आने वाले दिनों में हाईकोर्ट में इस पर बड़ी बहस देखने को मिल सकती है।
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