नई दिल्ली (इंटरनेशनल डेस्क)। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी ने 16 मार्च 2026 को मुस्लिम देशों और उनके नागरिकों के नाम एक बेहद कड़ा और भावुक संदेश जारी किया है। इस 6-सूत्रीय संदेश में उन्होंने सीधे तौर पर पूछा है कि इस संघर्ष में “आप किस तरफ हैं?”। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब ईरान अमेरिका और इजरायल के साथ सीधे सैन्य संघर्ष (युद्ध) की स्थिति में है और ईरान के कई सैन्य अड्डों व नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है।
लारीजानी ने अपने संबोधन में कहा कि ईरान पर
नई दिल्ली (इंटरनेशनल डेस्क)। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी ने 16 मार्च 2026 को मुस्लिम देशों और उनके नागरिकों के नाम एक बेहद कड़ा और भावुक संदेश जारी किया है। इस 6-सूत्रीय संदेश में उन्होंने सीधे तौर पर पूछा है कि इस संघर्ष में “आप किस तरफ हैं?”। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब ईरान अमेरिका और इजरायल के साथ सीधे सैन्य संघर्ष (युद्ध) की स्थिति में है और ईरान के कई सैन्य अड्डों व नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है।
लारीजानी ने अपने संबोधन में कहा कि ईरान पर “अमेरिकी-जायोनी गठबंधन” द्वारा विश्वासघाती हमले किए गए, जिसका उद्देश्य ईरान को टुकड़ों में बांटना था। उन्होंने इस बात पर गहरा दुख जताया कि इस कठिन समय में मुस्लिम देशों ने ईरान का साथ नहीं दिया।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए किया जा रहा है, तो क्या ईरान हाथ पर हाथ धरकर बैठा रहे? लारीजानी ने चेतावनी दी कि यदि ईरान इन ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई करता है, तो कुछ मुस्लिम देश ईरान को ही अपना दुश्मन बताने लगते हैं, जो कि एक “खोखला बहाना” है।
ईरान ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि आज की लड़ाई दो खेमों में बंट चुकी है—एक तरफ अमेरिका और इजरायल हैं, तो दूसरी तरफ मुस्लिम ईरान और प्रतिरोध की ताकतें (Axis of Resistance)। उन्होंने मुस्लिम शासकों को झकझोरते हुए कहा कि अमेरिका कभी किसी का वफादार नहीं रहा और इजरायल हकीकत में उनका दुश्मन है। उन्होंने पैगंबर मोहम्मद की एक हदीस का हवाला देते हुए कहा कि “जो कोई भी ‘ओ मुस्लिमों!’ की पुकार सुने और मदद के लिए न आए, वह मुसलमान नहीं है।”
इस संदेश के माध्यम से ईरान ने मुस्लिम जगत से ‘इस्लामिक उम्मा’ की एकता का आह्वान किया है और दावा किया है कि ईरान का इरादा किसी पर प्रभुत्व जमाना नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है। ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि वह पीछे हटने वाला नहीं है और अमेरिका व इजरायल के खिलाफ अपनी प्रतिरोध की राह पर अडिग रहेगा।
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