इज़राइल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर अब दूसरे देशो पर भी दिखने लगा है। भारत पर भी इस युद्ध का नकारात्मक प्रभाव दिख रहा है। एलएनजी (LNG) सप्लाई प्रभावित होने की खबरों के बीच रुपया डॉलर के मुकाबले 92 के स्तर के नीचे गिर गया है।
जानकारों की माने तो बढ़ते सैन्य तनाव ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। यह क्षेत्र वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है। भारत अपनी जरूरत की 50% से अधिक प्राकृतिक गैस (LNG) आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा
इज़राइल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर अब दूसरे देशो पर भी दिखने लगा है। भारत पर भी इस युद्ध का नकारात्मक प्रभाव दिख रहा है। एलएनजी (LNG) सप्लाई प्रभावित होने की खबरों के बीच रुपया डॉलर के मुकाबले 92 के स्तर के नीचे गिर गया है।
जानकारों की माने तो बढ़ते सैन्य तनाव ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। यह क्षेत्र वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है। भारत अपनी जरूरत की 50% से अधिक प्राकृतिक गैस (LNG) आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है।
कतर और यूएई जैसे देशों से आने वाले जहाजों को अब लंबे और महंगे रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलएनजी की स्पॉट कीमतें पिछले एक हफ्ते में 15% तक बढ़ गई हैं। इसका सीधा असर भारत के उर्वरक (Fertilizer), बिजली उत्पादन और सीएनजी (CNG) की कीमतों पर पड़ेगा।
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भारत का व्यापार घाटा (Trade Deficit) बढ़ रहा है। विदेशी निवेश की निकासी: अनिश्चितता के माहौल में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश (जैसे सोना या डॉलर) की ओर भाग रहे हैं।वैश्विक स्तर पर डॉलर इंडेक्स में मजबूती आने से उभरती अर्थव्यवस्थाओं की करेंसी दबाव में है।
रूपये के मुकाबले डॉलर की कीमत बढ़ना तथा ईंधन और गैस महंगी होने से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिससे खाने-पीने की वस्तुओं और माल ढुलाई के दामों में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।
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