चुनाव आयोग पर फिर बिफरीं ममता बनर्जी, इलेक्शन कमीशन को बताया तुगलकी कमीशन

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज (17 फरवरी 2026) भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उसे ‘तुगलकी कमीशन’ करार दिया है। बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची में संशोधन (SIR – Special Intensive Revision) को लेकर यह विवाद काफी गहरा गया है।

‘तुगलकी कमीशन’ क्यों कहा?
ममता बनर्जी ने 14वीं सदी के सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक का हवाला देते हुए आयोग पर यह तंज कसा। उनका आरोप है कि आयोग बिना किसी ठोस योजना के ‘सनकी’ और ‘मनमाने’ फैसले ले रहा है, जिससे आम जनता और राज्य के अधिकारी परेशान हैं। उन्होंने आयोग की तुलना ‘हिटलर’ और ‘वाशिंग मशीन’ (जो लोकतांत्रिक अधिकारों को धो रही है) से भी की।

58 लाख मतदाताओं के नाम काटना: मुख्यमंत्री का सबसे बड़ा आरोप यह है कि निर्वाचन आयोग ने भाजपा के इशारे पर बंगाल की मतदाता सूची से करीब 58 लाख नाम हटा दिए हैं। उन्होंने दावा किया कि AI (Artificial Intelligence) का इस्तेमाल कर गलत तरीके से नाम हटाए गए हैं।

अधिकारियों का निलंबन: हाल ही में आयोग ने बंगाल के 7 सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (AEROs) को कर्तव्य में लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया था। ममता ने इसे ‘प्रतिशोध की राजनीति’ बताया और घोषणा की कि उनकी सरकार इन अधिकारियों का 100% बचाव करेगी और उन्हें प्रमोट (पदोनत) करेगी।

दस्तावेजों में भेदभाव: उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार जैसे राज्यों में जो दस्तावेज मान्य हैं, उन्हें बंगाल में खारिज किया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया— “क्या बंगाल भारत का हिस्सा नहीं है?”

विजिटिंग कार्ड जैसा व्यवहार: उन्होंने कहा कि आयोग राज्य सरकार के अधिकारियों को आतंकवादियों की तरह निशाना बना रहा है और उन्हें धमका रहा है।

कानूनी और राजनीतिक स्थिति
सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत पेशी: इस महीने की शुरुआत में ममता बनर्जी खुद सुप्रीम कोर्ट में पेश हुई थीं और मतदाता सूची में गड़बड़ी के खिलाफ अपनी बात रखी थी।

160 लोगों की मौत का दावा: मुख्यमंत्री ने एक गंभीर दावा करते हुए कहा कि SIR प्रक्रिया के तनाव और कार्यभार के कारण राज्य में अब तक 160 लोगों की जान जा चुकी है।

आयोग का पक्ष: चुनाव आयोग ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। आयोग का कहना है कि यह एक पारदर्शी और नियम-आधारित प्रक्रिया है और जो अधिकारी काम में लापरवाही कर रहे हैं, उन पर कार्रवाई करना आयोग का संवैधानिक अधिकार है।


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