लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनि मत से गिर गया। विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को इसलिए भी अहम् माना गया क्यों कि करीब चार दशकों के बाद किसी स्पीकर के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव लाया गया था। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि वोटों की गिनती की नौबत ही नहीं आई।
गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि लगभग 40 साल बाद किसी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है, जो संसदीय लोकतंत्र के लिए दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनि मत से गिर गया। विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को इसलिए भी अहम् माना गया क्यों कि करीब चार दशकों के बाद किसी स्पीकर के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव लाया गया था। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि वोटों की गिनती की नौबत ही नहीं आई।
गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि लगभग 40 साल बाद किसी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है, जो संसदीय लोकतंत्र के लिए दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है।
अमित शाह ने कहा कि स्पीकर किसी पार्टी का नहीं, बल्कि सदन का संरक्षक होता है। उन्होंने राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब महत्वपूर्ण सत्र होते हैं, तो वे विदेश यात्रा पर होते हैं, ऐसे में वे सदन में कैसे बोलेंगे?
लोकसभा में जब इस प्रस्ताव पर वोटिंग का समय आया, तो विपक्षी सांसद गृह मंत्री अमित शाह के भाषण के दौरान कुछ टिप्पणियों को लेकर हंगामा और नारेबाजी कर रहे थे।
वोटिंग का तरीका:
पीठासीन अधिकारी (Chair) जगदंबिका पाल ने प्रस्ताव को ‘ध्वनिमत’ (Voice Vote) के लिए रखा। सत्ता पक्ष (NDA) की ओर से ‘हाँ’ की आवाज बहुत बुलंद थी, जबकि विपक्ष हंगामे के कारण संगठित तरीके से विरोध दर्ज नहीं करा सका। इसके आधार पर पीठासीन अधिकारी ने घोषणा की कि प्रस्ताव ‘अस्वीकार’ (Negated) कर दिया गया है।
हालांकि लिखित रूप में इस प्रस्ताव पर 118 विपक्षी सांसदों (कांग्रेस, सपा, डीएमके, आरजेडी और वामपंथी दल) ने हस्ताक्षर किए थे, लेकिन सदन में मत विभाजन (Division of Votes) नहीं हुआ।
पूरा घटनाक्रम:
कांग्रेस सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद ने 10 मार्च को आधिकारिक रूप से यह संकल्प पेश किया था। इस पर करीब 13 घंटे तक लंबी बहस चली, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के 42 सांसदों ने हिस्सा लिया।
नैतिक आधार पर ओम बिरला ने चर्चा के दौरान सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया और आसन (Chair) पर नहीं बैठे। उनकी जगह जगदंबिका पाल सदन का संचालन कर रहे थे।
11 मार्च की शाम गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा का जवाब दिया। उन्होंने विपक्ष पर “लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा गिराने” का आरोप लगाया और कहा कि 40 साल बाद ऐसा प्रस्ताव लाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
संवैधानिक नियम (Rule 94-C):
सदन में यह भी स्पष्ट किया गया कि स्पीकर को हटाने के लिए ‘साधारण बहुमत’ नहीं बल्कि ‘प्रभावी बहुमत’ (Effective Majority) की आवश्यकता होती है। चूंकि भाजपा और एनडीए के पास पूर्ण बहुमत है, इसलिए गणितीय रूप से इस प्रस्ताव का पास होना पहले से ही नामुमकिन माना जा रहा था।
Discover more from In Breaking
Subscribe to get the latest posts sent to your email.

