बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों पर होने वाले आगामी चुनाव (16 मार्च, 2026) को लेकर एनडीए (NDA) के अंदर खींचतान की खबरें आ रही हैं। बीजेपी और सहयोगी दलों के बीच ‘पांचवीं सीट’ और ‘उम्मीदवारों के चयन’ को लेकर पेच फंसा हुआ है। वहीँ कोई भी दल कदम खींचने को तैयार नहीं है।
1. सीटों का गणित और दावेदारी
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की प्रचंड जीत (202 सीटें) के बाद समीकरण बदल गए हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों के वोट चाहिए।
भाजपा (89 सीटें): भाजपा अपनी संख्या के आधार पर 2 सीटों पर सीधा
बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों पर होने वाले आगामी चुनाव (16 मार्च, 2026) को लेकर एनडीए (NDA) के अंदर खींचतान की खबरें आ रही हैं। बीजेपी और सहयोगी दलों के बीच ‘पांचवीं सीट’ और ‘उम्मीदवारों के चयन’ को लेकर पेच फंसा हुआ है। वहीँ कोई भी दल कदम खींचने को तैयार नहीं है।
1. सीटों का गणित और दावेदारी
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की प्रचंड जीत (202 सीटें) के बाद समीकरण बदल गए हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों के वोट चाहिए।
भाजपा (89 सीटें): भाजपा अपनी संख्या के आधार पर 2 सीटों पर सीधा दावा कर रही है।
जेडीयू (85 सीटें): जेडीयू भी अपनी 2 सीटें सुरक्षित मानकर चल रही है।
पेच (5वीं सीट): असली मुकाबला पांचवीं सीट को लेकर है। एनडीए के पास कुल 202 विधायक हैं, यानी वे आसानी से 4 सीटें जीत सकते हैं और 5वीं सीट के लिए उन्हें मात्र 3 और वोटों की जरूरत होगी (जो निर्दलीय या अन्य से मिल सकते हैं)।
2. सहयोगियों के बीच खींचतान (The Rift Points)
एनडीए के छोटे सहयोगी दल इस पांचवीं सीट पर अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं:
चिराग पासवान (LJP-RV): चिराग पासवान की पार्टी के 19 विधायक हैं। पार्टी के अंदर मांग उठ रही है कि चिराग की माता रीना पासवान को राज्यसभा भेजा जाए। हालांकि चिराग ने सार्वजनिक रूप से इसे अभी टाला है, लेकिन दबाव बरकरार है।
उपेंद्र कुशवाहा (RLM): कुशवाहा की सीट खाली हो रही है। वे फिर से राज्यसभा जाना चाहते हैं, लेकिन चर्चा है कि भाजपा या जेडीयू उनकी जगह किसी नए चेहरे को मौका दे सकती है। कुशवाहा के बेटे को पहले ही राज्य सरकार में मंत्री बनाया जा चुका है, जिसे भाजपा अपना ‘कोटा पूरा’ होना मान रही है।
जीतराम मांझी (HAM): मांझी भी अपने दल के लिए उच्च सदन में हिस्सेदारी की मांग कर रहे हैं, जिससे गठबंधन के अंदर अंदरूनी कलह दिख रही है।
3. जेडीयू के अंदर की दुविधा
जेडीयू के दो दिग्गजों का कार्यकाल खत्म हो रहा है:
हरिवंश नारायण सिंह (राज्यसभा उपसभापति)
रामनाथ ठाकुर (कर्पूरी ठाकुर के बेटे और केंद्रीय मंत्री)
पार्टी के अंदर “दो बार से ज्यादा मौका नहीं देने” की नीति को लेकर चर्चा है। अगर नीतीश कुमार कड़ा फैसला लेते हैं, तो इन बड़े नामों का पत्ता कट सकता है, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष पैदा होने की आशंका है।
4. विपक्ष (RJD) की चाल
लालू यादव की आरजेडी के पास केवल 25 विधायक हैं। एक सीट जीतने के लिए उन्हें 41 वोट चाहिए। आरजेडी की नजर एनडीए के असंतुष्ट विधायकों और ओवैसी की पार्टी (AIMIM) पर है। अगर एनडीए में सीटों का बंटवारा सही नहीं हुआ, तो विपक्ष सेंधमारी की कोशिश कर सकता है।
मुख्य तिथियां:
नामांकन शुरू: 26 फरवरी, 2026
नामांकन की आखिरी तारीख: 5 मार्च, 2026
मतदान: 16 मार्च, 2026
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