सुप्रीमकोर्ट ने हेमंत सोरेन के खिलाफ ED द्वारा शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाई

Hemant soren E857335

सुप्रीम कोर्ट ने 25 फरवरी 2026 को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है।

यह मामला ED के समन की अनदेखी करने से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सोरेन ने भूमि घोटाले की जांच के दौरान सात से अधिक समन मिलने के बावजूद पेश होने से परहेज किया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने इस मामले में ED को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब ED ने रांची की एक अदालत में शिकायत दर्ज कराई कि मुख्यमंत्री जानबूझकर जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और समन की अवहेलना कर रहे हैं, जो कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 174 के तहत एक अपराध है।

इससे पहले झारखंड हाई कोर्ट ने सोरेन की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें उन्होंने इस कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी। हाई कोर्ट का तर्क था कि सोरेन को व्यक्तिगत रूप से पेश होना चाहिए था या नहीं, यह मुकदमे के दौरान तय होने वाला तथ्य है। इसी फैसले को चुनौती देते हुए सोरेन ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां उनके वकील मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि मुख्यमंत्री को परेशान करने के लिए यह सब किया जा रहा है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए ED से कहा कि वे अपनी ऊर्जा उन मुख्य शिकायतों और मामलों पर केंद्रित करें जो अधिक गंभीर हैं, न कि इस तरह की “डराने वाली” (In Terrorem) कार्यवाहियों पर।

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि चूंकि हेमंत सोरेन मुख्य भूमि घोटाले के मामले में पहले से ही जमानत पर बाहर हैं, इसलिए समन की तामील न होने पर अलग से क्रिमिनल ट्रायल की फिलहाल जरूरत नहीं लगती। शीर्ष अदालत के इस आदेश के बाद अब रांची की निचली अदालत में सोरेन के खिलाफ चल रही इस विशिष्ट केस की सुनवाई पर फिलहाल ब्रेक लग गया है।


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