पश्चिम बंगाल में Special Intensive Revision (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2026 में कई महत्वपूर्ण और कड़े आदेश दिए हैं। चुनाव आयोग (EC) और राज्य सरकार के बीच ‘भरोसे की कमी’ (Trust Deficit) को देखते हुए कोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया में न्यायपालिका को सीधे तौर पर शामिल कर लिया है।
1. अन्य राज्यों से बुलाए जाएंगे जज:
सुप्रीम कोर्ट (CJI सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ) ने आदेश दिया है कि अगर पश्चिम बंगाल में जजों की कमी पड़ती है, तो ओडिशा और झारखंड से न्यायिक अधिकारियों को बुलाया
पश्चिम बंगाल में Special Intensive Revision (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2026 में कई महत्वपूर्ण और कड़े आदेश दिए हैं। चुनाव आयोग (EC) और राज्य सरकार के बीच ‘भरोसे की कमी’ (Trust Deficit) को देखते हुए कोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया में न्यायपालिका को सीधे तौर पर शामिल कर लिया है।
1. अन्य राज्यों से बुलाए जाएंगे जज:
सुप्रीम कोर्ट (CJI सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ) ने आदेश दिया है कि अगर पश्चिम बंगाल में जजों की कमी पड़ती है, तो ओडिशा और झारखंड से न्यायिक अधिकारियों को बुलाया जा सकता है। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि बंगाल में लगभग 50 से 80 लाख मतदाता नामों में विसंगतियां (Discrepancies) पाई गई हैं, जिन्हें ठीक करने के लिए भारी मैनपावर की जरूरत है।
2. सिविल जजों की तैनाती:
कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को अनुमति दी है कि वे 3 साल से अधिक अनुभव वाले सिविल जजों (जूनियर और सीनियर डिवीजन) को भी इस काम में लगा सकते हैं। पहले केवल जिला जजों और अतिरिक्त जिला जजों को ही इस काम के लिए नियुक्त करने की बात कही गई थी।
3. पहचान पत्र (Documents) को लेकर स्पष्टीकरण:
माध्यमिक (कक्षा 10) का एडमिट कार्ड: कोर्ट ने साफ किया है कि 10वीं का एडमिट कार्ड अकेले पहचान पत्र के तौर पर इस्तेमाल नहीं होगा। इसे पास सर्टिफिकेट (Pass Certificate) के साथ ‘सप्लीमेंट्री’ दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है ताकि जन्मतिथि और माता-पिता के नाम की पुष्टि हो सके।
आधार कार्ड: आधार कार्ड को पहचान के प्रमाण के तौर पर स्वीकार किया जाएगा।
4. 28 फरवरी की डेडलाइन:
चुनाव आयोग को आदेश दिया गया है कि वे 28 फरवरी, 2026 तक फाइनल मतदाता सूची प्रकाशित करें। कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का उपयोग करते हुए कहा कि जो नाम बाद में ‘सप्लीमेंट्री लिस्ट’ के जरिए जोड़े जाएंगे, उन्हें भी 28 फरवरी की लिस्ट का ही हिस्सा माना जाएगा।
5. सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स:
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि तैनात किए गए न्यायिक अधिकारियों को राज्य सरकार और पुलिस पूरी सुरक्षा और रसद (Logistical Support) प्रदान करेगी। किसी भी तरह की बाधा डालने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
मामला क्या है?
दरअसल, चुनाव आयोग ने शिकायत की थी कि पश्चिम बंगाल सरकार और प्रशासन मतदाता सूची के सुधार (SIR) में सहयोग नहीं कर रहे हैं। आयोग ने आरोप लगाया था कि राज्य पुलिस और अधिकारियों द्वारा काम में बाधा डाली जा रही है, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने “असाधारण स्थिति” बताते हुए जजों को इस प्रक्रिया की निगरानी और सत्यापन (Verification) के लिए तैनात करने का फैसला सुनाया।
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