उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सवर्ण मोर्चा के बैनर तले यूजीसी (UGC) के नए नियमों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन हुआ। इस आंदोलन की सबसे बड़ी चर्चा का केंद्र रहे अलंकार अग्निहोत्री, जिन्होंने इस मुद्दे पर कुछ समय पहले अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
हंगामेदार प्रदर्शन: लखनऊ के परिवर्तन चौक पर भारी संख्या में सवर्ण समाज के लोग और मोर्चा के कार्यकर्ता इकट्ठा हुए। प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी के नए नियमों को ‘काला कानून’ बताते हुए नारेबाजी की।
पुलिस से धक्का-मुक्की: आंदोलनकारी इतने
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सवर्ण मोर्चा के बैनर तले यूजीसी (UGC) के नए नियमों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन हुआ। इस आंदोलन की सबसे बड़ी चर्चा का केंद्र रहे अलंकार अग्निहोत्री, जिन्होंने इस मुद्दे पर कुछ समय पहले अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
हंगामेदार प्रदर्शन: लखनऊ के परिवर्तन चौक पर भारी संख्या में सवर्ण समाज के लोग और मोर्चा के कार्यकर्ता इकट्ठा हुए। प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी के नए नियमों को ‘काला कानून’ बताते हुए नारेबाजी की।
पुलिस से धक्का-मुक्की: आंदोलनकारी इतने उग्र थे कि उन्होंने पुलिस की बैरिकेडिंग पर चढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प और धक्का-मुक्की हुई।
हिरासत में लिए गए कार्यकर्ता: स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया और उन्हें बसों में भरकर ईको गार्डन भेज दिया। इस दौरान इलाके में काफी समय तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
अलंकार अग्निहोत्री की भूमिका
बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट (PCS अधिकारी) अलंकार अग्निहोत्री, जिन्होंने जनवरी 2026 में यूजीसी के नियमों और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान के विरोध में इस्तीफा दिया था, आज विशेष रूप से इस प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सवर्ण समाज अब भाजपा से छिटक चुका है।
विरोध का तरीका: प्रदर्शन के दौरान वे हाथ में तख्ती लिए दिखे और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने इसे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया।
विवाद की मुख्य वजह क्या है?
यूजीसी (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) रेगुलेशन, 2026 को लेकर विरोध हो रहा है।
आरोप: प्रदर्शनकारियों का दावा है कि ये नियम सामान्य वर्ग (General Category) के छात्रों के प्रति भेदभावपूर्ण हैं और इससे कैंपस में जातिगत संघर्ष बढ़ सकता है।
कोर्ट का रुख: हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर फिलहाल रोक (Stay) लगा दी है, लेकिन सवर्ण समाज की मांग है कि इन नियमों को पूरी तरह से वापस लिया जाए।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
इस प्रदर्शन में जगद्गुरु रामभद्राचार्य का भी समर्थन चर्चा में रहा, जिन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन नियमों को वापस नहीं लिया गया तो देश में ‘गृहयुद्ध’ जैसी स्थिति बन सकती है। विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस और बसपा ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।
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