नई दिल्ली (इंटरनेशनल डेस्क)। अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने अपनी 2026 की वार्षिक रिपोर्ट में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर ‘लक्षित प्रतिबंध’ (Targeted Sanctions) लगाने की सिफारिश की है।
आयोग ने अमेरिकी सरकार से आग्रह किया है कि वह धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघन के लिए जिम्मेदार होने और इसे बढ़ावा देने के आधार पर RSS और भारत की खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ (R&AW) जैसे संगठनों और इनसे जुड़े व्यक्तियों की संपत्ति फ्रीज करे और उनके अमेरिका प्रवेश पर रोक लगाए।
रिपोर्ट में
नई दिल्ली (इंटरनेशनल डेस्क)। अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने अपनी 2026 की वार्षिक रिपोर्ट में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर ‘लक्षित प्रतिबंध’ (Targeted Sanctions) लगाने की सिफारिश की है।
आयोग ने अमेरिकी सरकार से आग्रह किया है कि वह धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघन के लिए जिम्मेदार होने और इसे बढ़ावा देने के आधार पर RSS और भारत की खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ (R&AW) जैसे संगठनों और इनसे जुड़े व्यक्तियों की संपत्ति फ्रीज करे और उनके अमेरिका प्रवेश पर रोक लगाए।
रिपोर्ट में लगातार सातवें साल भारत को ‘विशेष चिंता वाले देश’ (CPC) की श्रेणी में रखने की मांग की गई है, जिसमें उन देशों को शामिल किया जाता है जहां धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन ‘व्यवस्थित और गंभीर’ स्तर पर होता है।
USCIRF की इस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2025 के दौरान भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति और खराब हुई है। आयोग ने उत्तराखंड के अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम, वक्फ (संशोधन) विधेयक और विभिन्न राज्यों में लागू धर्मांतरण विरोधी कानूनों का हवाला देते हुए इन्हें अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन करने वाला बताया है।
इसके अलावा रिपोर्ट में अमेरिकी सरकार को यह सुझाव भी दिया गया है कि वह भारत के साथ भविष्य में होने वाली सुरक्षा सहायता और द्विपक्षीय व्यापार समझौतों को धार्मिक स्वतंत्रता में सुधार की शर्तों के साथ जोड़े।
विदेश मंत्रालय ने किया ख़ारिज:
दूसरी तरफ भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह से खारिज कर दिया है और इसे ‘प्रेरित और पक्षपाती’ करार दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बयान जारी कर कहा कि USCIRF लगातार भारत की एक विकृत और चुनिंदा तस्वीर पेश कर रहा है, जो तथ्यों के बजाय संदिग्ध स्रोतों और वैचारिक एजेंडे पर आधारित है।
भारत ने यह भी कहा कि ऐसी रिपोर्टों से आयोग की खुद की विश्वसनीयता कम होती है और उसे भारत पर सवाल उठाने के बजाय अमेरिका के भीतर हिंदू मंदिरों पर हो रहे हमलों और वहां रहने वाले भारतीय समुदाय के साथ बढ़ती असहिष्णुता पर ध्यान देना चाहिए। भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह इस प्रकार के हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करती और आयोग के दावों का जमीनी हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है।
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