अयातुल्ला अली ख़ामेनेई की मृत्यु ईरान के आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा मोड़ है। ईरान इस वक्त ‘घायल शेर’ की स्थिति में है। वह न केवल अपनी सत्ता बचाने के लिए संघर्ष करेगा, बल्कि अपनी विचारधारा को जीवित रखने के लिए इस क्षेत्र को एक भीषण और लंबे युद्ध में धकेल सकता है। आने वाले समय में ईरान की रणनीति तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित हो सकती है:
1. संवैधानिक उत्तराधिकार और आंतरिक स्थिरता
ईरानी संविधान के अनुच्छेद 111 के अनुसार, एक अस्थायी नेतृत्व परिषद (जिसमें राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन,
अयातुल्ला अली ख़ामेनेई की मृत्यु ईरान के आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा मोड़ है। ईरान इस वक्त ‘घायल शेर’ की स्थिति में है। वह न केवल अपनी सत्ता बचाने के लिए संघर्ष करेगा, बल्कि अपनी विचारधारा को जीवित रखने के लिए इस क्षेत्र को एक भीषण और लंबे युद्ध में धकेल सकता है। आने वाले समय में ईरान की रणनीति तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित हो सकती है:
1. संवैधानिक उत्तराधिकार और आंतरिक स्थिरता
ईरानी संविधान के अनुच्छेद 111 के अनुसार, एक अस्थायी नेतृत्व परिषद (जिसमें राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, न्यायपालिका प्रमुख और गार्जियन काउंसिल के एक सदस्य शामिल हैं) ने कार्यभार संभाल लिया है। अगले कुछ दिनों में 88-सदस्यीय ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ नए सर्वोच्च नेता का चयन करेगी। प्रमुख उम्मीदवारों में ख़ामेनेई के बेटे मुजतबा ख़ामेनेई और कट्टरपंथी मौलवी अलीरेज़ा अराफ़ी के नाम चर्चा में हैं। शासन का प्राथमिक लक्ष्य आंतरिक विद्रोह को रोकना और ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) की पकड़ मजबूत बनाए रखना होगा।
2. ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ और सैन्य जवाबी कार्रवाई
ईरान अपने सर्वोच्च नेता की मौत को ‘युद्ध की घोषणा’ मान रहा है। IRGC पहले ही 27 अमेरिकी और इजरायली ठिकानों पर हमलों का दावा कर चुका है। आने वाले समय में ईरान अपने छद्म संगठनों (Proxies) जैसे हिजबुल्लाह, हूतियों और हमास के जरिए इजरायल पर ‘मल्टी-फ्रंट’ हमले तेज कर सकता है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करना या वैश्विक तेल आपूर्ति को बाधित करना ईरान का एक बड़ा हथियार हो सकता है।
3. परमाणु नीति में बदलाव
अस्तित्व के संकट को देखते हुए ईरान अपनी परमाणु नीति को और आक्रामक बना सकता है। नेतृत्व के अभाव में सैन्य गुट दबाव डाल सकते हैं कि ईरान आत्मरक्षा के लिए परमाणु हथियार बनाने की अपनी प्रक्रिया को अंतिम रूप दे।
4- हमले का विवरण और हताहत
ऑपरेशन: यह हमला शनिवार, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा संयुक्त रूप से किया गया, जिसे ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ और ‘लायंस रोर’ नाम दिया गया है।
अन्य मौतें: हमले में केवल ख़ामेनेई ही नहीं, बल्कि ईरान के रक्षा मंत्री जनरल अज़ीज़ नासिरज़ादेह, सेना प्रमुख जनरल अब्दुल रहीम मौसावी, और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के शीर्ष नेता भी मारे गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, ख़ामेनेई के परिवार के कुछ सदस्य भी इस हमले का शिकार हुए हैं।
5. ईरान की आंतरिक स्थिति
शोक और छुट्टियां: ईरान ने 40 दिनों के राजकीय शोक और 7 दिनों के सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है। तेहरान की सड़कों पर ‘डेथ टू अमेरिका’ के नारों के साथ भारी भीड़ उमड़ रही है।
नेतृत्व संकट: राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस हमले को “मुसलमानों के खिलाफ युद्ध की घोषणा” बताया है। वर्तमान में एक अस्थायी नेतृत्व परिषद देश का संचालन कर रही है, लेकिन नए ‘सर्वोच्च नेता’ के चयन के लिए ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ की बैठक जल्द होने वाली है।
5. उत्तराधिकार की दौड़: मुख्य दावेदार
ख़ामेनेई के बाद सर्वोच्च पद के लिए तीन नाम सबसे प्रमुखता से उभर रहे हैं:
मुजतबा ख़ामेनेई: ख़ामेनेई के दूसरे बेटे, जिनका IRGC और प्रशासन पर गहरा प्रभाव है। हालांकि, ईरान में “वंशवाद” (पिता के बाद पुत्र) का विरोध भी हो सकता है।
अलीरेज़ा अराफ़ी: एक वरिष्ठ कट्टरपंथी मौलवी जिन्हें वर्तमान में अंतरिम व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है।
हसन खोमैनी: क्रांति के जनक अयातुल्ला खोमैनी के पोते, जिन्हें उदारवादी गुटों का समर्थन मिल सकता है।
6. वैश्विक प्रतिक्रिया और प्रभाव
डोनाल्ड ट्रंप: अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस हमले को “ईरानी लोगों के लिए न्याय” और “स्वतंत्रता का सबसे बड़ा अवसर” बताया है।
हवाई यातायात: इस तनाव के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य और खाड़ी देशों का हवाई क्षेत्र लगभग बंद है। अकेले भारत की 444 उड़ानें रद्द हुई हैं, और एयर इंडिया व इंडिगो ने 7 मार्च तक अपनी सेवाएं सीमित कर दी हैं।
तेल की कीमतें: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है, क्योंकि ईरान ने जवाबी कार्रवाई के रूप में खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमले शुरू कर दिए हैं।
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