लोकसभा में आज राहुल गांधी ने अपने सम्बोधन में अपने तेवर से अपने इरादे स्पष्ट कर दिए थे कि वे हर स्तर पर सरकार के खिलाफ हल्लाबोल करेंगे। वहीँ सरकार ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वह लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन (Breach of Privilege) का प्रस्ताव लाएगी।
इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट पढ़े:
1. मुख्य कारण: ‘एप्स्टीन फाइल्स’ और अडानी पर आरोप
विवाद की शुरुआत तब हुई जब राहुल गांधी ने सदन में बजट पर चर्चा के दौरान ‘एप्स्टीन फाइल्स’ (Epstein Files) का जिक्र किया।
गंभीर
लोकसभा में आज राहुल गांधी ने अपने सम्बोधन में अपने तेवर से अपने इरादे स्पष्ट कर दिए थे कि वे हर स्तर पर सरकार के खिलाफ हल्लाबोल करेंगे। वहीँ सरकार ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वह लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन (Breach of Privilege) का प्रस्ताव लाएगी।
इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट पढ़े:
1. मुख्य कारण: ‘एप्स्टीन फाइल्स’ और अडानी पर आरोप
विवाद की शुरुआत तब हुई जब राहुल गांधी ने सदन में बजट पर चर्चा के दौरान ‘एप्स्टीन फाइल्स’ (Epstein Files) का जिक्र किया।
गंभीर आरोप: राहुल गांधी ने दावा किया कि उद्योगपति गौतम अडानी के खिलाफ अमेरिका में चल रहे मुकदमों का असर भारत के बजट और राजनीति पर दिख रहा है।
मंत्रियों पर निशाना: उन्होंने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम लेते हुए सीधे तौर पर पूछा कि उन्हें ‘एप्स्टीन’ से किसने मिलवाया था? साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि एप्स्टीन फाइल्स में नाम होने के कारण ही कुछ लोगों (जैसे अनिल अंबानी) को बचाया जा रहा है।
2. सरकार का तर्क: “बिना प्रमाण और बिना नोटिस के आरोप”
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस कदम की जानकारी दी। सरकार के मुख्य तर्क निम्नलिखित हैं:
संसदीय नियमों का उल्लंघन: नियम के अनुसार, यदि कोई सदस्य किसी दूसरे सदस्य या मंत्री पर व्यक्तिगत या गंभीर आरोप लगाता है, तो उसे पहले अग्रिम नोटिस (Prior Notice) देना होता है, जो राहुल गांधी ने नहीं दिया।
भ्रामक बयान: सरकार का कहना है कि राहुल गांधी ने ‘एप्स्टीन फाइल्स’ जैसे संवेदनशील और असत्यापित विषयों को उठाकर सदन को गुमराह करने की कोशिश की है।
प्रमाणीकरण (Authentication): सरकार ने मांग की है कि राहुल गांधी सदन में रखे गए अपने हर शब्द और आरोप को प्रमाणित करें, अन्यथा यह सदन की गरिमा का अपमान माना जाएगा।
3. ‘भारत माता को बेचने’ का आरोप
राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) को लेकर भी सरकार पर “भारत माता को बेचने” का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने भारतीय डेटा और किसानों के हितों का समझौता किया है। इस “अपमानजनक भाषा” पर भी भाजपा सांसदों ने कड़ी आपत्ति जताई है।
4. आगे की कार्यवाही: शाम 5 बजे का अल्टीमेटम
सरकार ने राहुल गांधी को आज शाम 5 बजे तक अपने बयानों पर जवाब देने और आरोपों को साबित करने का अल्टीमेटम दिया था।
विशेषाधिकार समिति: यदि राहुल गांधी का जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो यह मामला लोकसभा की विशेषाधिकार समिति (Privilege Committee) को भेजा जा सकता है, जो जांच के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश कर सकती है।
विशेषाधिकार हनन क्या है?: जब कोई सांसद सदन में गलत जानकारी देता है या किसी अन्य सदस्य के अधिकारों और सदन की मर्यादा का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ यह प्रस्ताव लाया जाता है। दोषी पाए जाने पर सदस्य की सदस्यता निलंबित भी की जा सकती है।
प्रक्रिया क्या होती है?: जब भी कोई सदस्य ऐसा नोटिस देता है, तो लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) या राज्यसभा सभापति (Chairman) पहले इसे देखते हैं। यदि उन्हें लगता है कि मामला गंभीर है, तो वे इसे विशेषाधिकार समिति (Privileges Committee) को भेज देते हैं। समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही सजा तय होती है।
पहले किस किस नेता के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव आया है:
संसद में विशेषाधिकार हनन (Breach of Privilege) का प्रस्ताव आना कोई नई बात नहीं है, लेकिन इसके तहत कार्रवाई और सजा मिलना काफी दुर्लभ होता है। भारतीय संसदीय इतिहास में पक्ष और विपक्ष, दोनों के बड़े नेताओं के खिलाफ यह प्रस्ताव लाया जा चुका है।
यहाँ कुछ सबसे चर्चित और ऐतिहासिक मामले दिए गए हैं:
1. इंदिरा गांधी (1978) – सबसे प्रसिद्ध मामला
यह भारतीय इतिहास का सबसे कड़ा मामला माना जाता है।
कारण: 1978 में तत्कालीन जनता पार्टी सरकार इंदिरा गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाई थी। उन पर आरोप था कि उन्होंने 1975 में ‘मारुति प्रोजेक्ट’ से संबंधित जानकारी जुटाने वाले सरकारी अधिकारियों के काम में बाधा डाली थी।
नतीजा: उन्हें दोषी पाया गया और सदन से निष्कासित (Expelled) कर दिया गया। इतना ही नहीं, उन्हें सत्र के अंत तक जेल भी भेजा गया था।
2. सुब्रमण्यम स्वामी (1976)
कारण: आपातकाल के दौरान सुब्रमण्यम स्वामी ने विदेशी मीडिया को इंटरव्यू देते हुए भारतीय संसद और लोकतंत्र के खिलाफ अपमानजनक बातें कही थीं।
नतीजा: उनके व्यवहार को संसद की गरिमा के खिलाफ माना गया और उन्हें राज्यसभा से निष्कासित कर दिया गया था।
3. पी.वी. नरसिम्हा राव (1993): झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) रिश्वत कांड में सांसदों के विशेषाधिकार और उनकी सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मामला गया था, जिसने संसदीय विशेषाधिकारों की व्याख्या बदल दी।
4. सुषमा स्वराज (2017 और 2018)
2017: विपक्ष ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने नेहरूजी के योगदान को लेकर संसद को गुमराह किया है।
2018: इराक के मोसुल में मारे गए 39 भारतीयों के मुद्दे पर कांग्रेस ने उन पर सदन को “गुमराह करने” का आरोप लगाते हुए विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया था।
5. राहुल गांधी (पहले भी आ चुके हैं प्रस्ताव)
राहुल गांधी के खिलाफ पहले भी कई बार यह प्रस्ताव लाया जा चुका है:
2023: पीएम मोदी के खिलाफ “बिना सबूत आरोप” लगाने और अडानी मामले में दिए गए भाषण के बाद उनके खिलाफ प्रस्ताव आया था।
2021: किसान आंदोलन के दौरान संसद में नियम विरुद्ध ‘मौन’ रखने के लिए भाजपा सांसदों ने उनके खिलाफ नोटिस दिया था।
ताजा मामला (11 फरवरी 2026): अब ‘एप्स्टीन फाइल्स’ और मंत्रियों पर बिना नोटिस गंभीर आरोप लगाने के कारण उनके खिलाफ फिर से प्रस्ताव लाने की तैयारी है।
5. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
विपक्ष ने भी कई बार प्रधानमंत्री के खिलाफ नोटिस दिया है। उदाहरण के लिए, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के खिलाफ की गई टिप्पणियों या कुछ सरकारी नीतियों पर दिए गए बयानों को लेकर विपक्ष ने ‘विशेषाधिकार हनन’ की मांग की थी, हालांकि इनमें से अधिकतर नोटिस अध्यक्ष द्वारा खारिज कर दिए गए।
6. अन्य चर्चित मामले
राघव चड्ढा और डेरेक ओ’ब्रायन (2023-24): राज्यसभा में कुछ सदस्यों की सहमति के बिना उनके नाम पैनल में शामिल करने या सदन की मर्यादा तोड़ने के आरोपों में इनके खिलाफ प्रस्ताव आए और राघव चड्ढा को कुछ समय के लिए निलंबित भी किया गया था।
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