सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2026 में NCERT की 8वीं कक्षा की नई सामाजिक विज्ञान (Social Science) की किताब से ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ (Corruption in the Judiciary) वाले हिस्से पर गंभीर आपत्ति जताई है।
कोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद NCERT ने इस किताब को अपनी वेबसाइट से हटा लिया है और इसकी बिक्री पर भी रोक लगा दी है।
विवाद का मुख्य कारण:
विवाद की जड़ 8वीं कक्षा की नई पुस्तक ‘Exploring Society: India and Beyond’ का एक अध्याय है, जिसका शीर्षक है: ‘The Role of the Judiciary in Our Society’ (हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका)।
इस अध्याय में न्यायपालिका के सामने
सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2026 में NCERT की 8वीं कक्षा की नई सामाजिक विज्ञान (Social Science) की किताब से ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ (Corruption in the Judiciary) वाले हिस्से पर गंभीर आपत्ति जताई है।
कोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद NCERT ने इस किताब को अपनी वेबसाइट से हटा लिया है और इसकी बिक्री पर भी रोक लगा दी है।
विवाद का मुख्य कारण:
विवाद की जड़ 8वीं कक्षा की नई पुस्तक ‘Exploring Society: India and Beyond’ का एक अध्याय है, जिसका शीर्षक है: ‘The Role of the Judiciary in Our Society’ (हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका)।
इस अध्याय में न्यायपालिका के सामने मौजूद चुनौतियों का जिक्र करते हुए निम्नलिखित बातें लिखी गई थीं:
न्यायपालिका में भ्रष्टाचार: इसमें कहा गया था कि न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार एक बड़ी चुनौती है।
शिकायतों का डेटा: किताब में बताया गया था कि 2017 से 2021 के बीच न्यायाधीशों के खिलाफ 1,600 से अधिक शिकायतें मिलीं।
मुकदमों का अंबार: इसमें अदालतों में लंबित करोड़ों मुकदमों (Backlog) का भी जिक्र था।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों जताई आपत्ति?
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए इसे “बेहद गंभीर और संस्थान को बदनाम करने वाला” बताया। कोर्ट की आपत्तियों के मुख्य बिंदु ये थे:
संस्थान की छवि खराब करना: CJI ने कहा, “मैं किसी को भी इस संस्था (न्यायपालिका) को बदनाम करने या इसकी अखंडता पर सवाल उठाने की अनुमति नहीं दूंगा।”
बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव: वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में दलील दी कि 8वीं कक्षा के छोटे बच्चों (लगभग 13-14 वर्ष) को यह पढ़ाना कि न्यायपालिका भ्रष्ट है, उनके मन में लोकतंत्र के इस महत्वपूर्ण स्तंभ के प्रति अविश्वास पैदा करेगा।
एकपक्षीय जानकारी: कोर्ट और वकीलों ने सवाल उठाया कि किताब में केवल न्यायपालिका के भ्रष्टाचार की बात क्यों की गई? इसमें कार्यपालिका (Executive) या विधायिका (Legislature) के भ्रष्टाचार का कोई जिक्र क्यों नहीं है? इसे एक “सोची-समझी साजिश” और “चयनात्मक (Selective) हमला” बताया गया।
संदर्भ से बाहर कोटेशन: किताब में पूर्व न्यायाधीश बी.आर. गवई के एक बयान को शामिल किया गया था, जिसे लेकर कहा गया कि उनके शब्दों को गलत संदर्भ में पेश किया गया है।
वर्तमान स्थिति-
किताब वापस ली गई: NCERT ने अपनी वेबसाइट से किताब का डिजिटल वर्जन हटा दिया है और छपी हुई प्रतियों को बाजार से वापस मंगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
संशोधन की तैयारी: सूत्रों के अनुसार, NCERT अब विषय विशेषज्ञों के साथ मिलकर इस अध्याय की समीक्षा करेगा और विवादित अंशों को पूरी तरह हटा दिया जाएगा।
कानूनी कार्रवाई: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले की गहराई से जांच करेगा कि आखिर किसके कहने पर और किस मंशा से यह सामग्री पाठ्यक्रम में शामिल की गई थी।
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