अमेरिका-इज़राइल के गठजोड़ द्वारा ईरान पर किया जा रहे हमलो के बीच खबर आ रही है कि ईरान पर हमलो को लेकर ट्रंप प्रशासन एक राय नहीं है और उसने सलाह दी है कि इज़राइल की बातो में आकर अमेरिका ईरान पर हमलो में अपना धन व्यय न करे।
एक न्यूज़ रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन चाहता है कि ईरान को बातचीत के लिए टेबल पर लाया जाए और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर विराम लगाने के लिए बातचीत का मौका दिया जाए। ख़बर के मुताबिक, ईरान से चार दिन तक युद्ध लड़ने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप के रुख में नरमी आई है। हालांकि
अमेरिका-इज़राइल के गठजोड़ द्वारा ईरान पर किया जा रहे हमलो के बीच खबर आ रही है कि ईरान पर हमलो को लेकर ट्रंप प्रशासन एक राय नहीं है और उसने सलाह दी है कि इज़राइल की बातो में आकर अमेरिका ईरान पर हमलो में अपना धन व्यय न करे।
एक न्यूज़ रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन चाहता है कि ईरान को बातचीत के लिए टेबल पर लाया जाए और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर विराम लगाने के लिए बातचीत का मौका दिया जाए। ख़बर के मुताबिक, ईरान से चार दिन तक युद्ध लड़ने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप के रुख में नरमी आई है। हालांकि ईरान में सत्ता परिवर्तन को लेकर ट्रंप अभी भी इज़राइल की हां में हां मिला रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कभी भी ईरान के खिलाफ युद्ध से हाथ खींच सकते हैं और ऐसी स्थति में इजराइल के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है। ईरान कहता रहा है कि उसका बड़ा दुश्मन इज़राइल है और वह इजराइल के हर हमले का सीधा जवाब देगा।
वहीँ जानकारों की माने तो ईरान ने युद्ध के लिए जिस कूटनीति का इस्तेमाल किया है उससे अमेरिका को बड़ा झटका लगा है। ईरान ने ईरान के आसपास के अरब देशो में मौजूद ईरान के सभी सैन्य अड्डों को लहूलुहान कर दिया है। ईरान उन अरब देशो को भी निशाना बना रहा है, जहां ईरान ने अपने सैन्य अड्डे बनाये हैं। इतना ही नहीं ईरान एक सोची समझी कूटनीति के तहत अरब देशो पर यह दवाब बनाने में कामयाब रहा है कि वे अमेरिका या इजराइल को ईरान पर हमले के लिए अपने एयर बेस का इस्तेमाल न करने दें।
दूसरी तरफ अमेरिका को ईरान से युद्ध बहुत मंहगा पड़ रहा है और प्रतिदिन करोड़ों रूपये खर्च हो रहे हैं। आर्थिक संकट से जूझ रहे अमेरिका के लिए इस युद्ध को ज़्यादा लंबा खिंच पाना मुमकिन नहीं है। वहीँ अमेरिका की इस कमजोरी को भांपते हुए ईरान युद्ध को लम्बा खींचना चाहता है लेकिन साथ ही उसकी चाहत है कि किसी तरह अमेरिका को साइड में खड़ा किया जाए और इजराइल को सबक सिखाया जाए।
खबर के मुताबिक, अमेरिका जानता है कि यदि ईरान के साथ उसका युद्ध लंबा चलता है तो रूस और चीन परदे के पीछे से ईरान के साथ एक्टिव हो जायेंगे जिसके फलस्वरूप दुनिया में एक बार फिर विश्व युद्ध का खतरा पैदा हो सकता है। अमेरिका इस सच को भी जानता है कि ईरान की टॉप लीडरशिप खो चुके ईरान के पास अब खोने के लिए कुछ बचा नहीं है ऐसे में एक घायल शेर की तरह वह बदला लेने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।
फ़िलहाल अगले दो- तीन दिन महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत आगे बढ़ सकती है और यदि बातचीत सकारात्मक रहती है तो अमेरिका इस युद्ध से खुद को अलग करने में देर नहीं लगाएगा। फिर बात रह जाएगी ईरान और इजराइल की। ऐसे में देखना होगा कि क्या ईरान खामोश होकर बैठ जायेगा या वह इजराइल के खिलाफ अपनी मुहिम जारी रखेगा।
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