नई दिल्ली। गृह मंत्रालय (MHA) ने एक बड़े घटनाक्रम में लद्दाख के प्रमुख पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक की हिरासत को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का आदेश दिया है। वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत लगभग छह महीने (170 दिन) से जोधपुर सेंट्रल जेल में रखा गया था।
मंत्रालय ने शनिवार, 14 मार्च 2026 को जारी अपने बयान में कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम की धारा 14 के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए वांगचुक की हिरासत रद्द करने का फैसला किया है।
उद्देश्य:
नई दिल्ली। गृह मंत्रालय (MHA) ने एक बड़े घटनाक्रम में लद्दाख के प्रमुख पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक की हिरासत को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का आदेश दिया है। वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत लगभग छह महीने (170 दिन) से जोधपुर सेंट्रल जेल में रखा गया था।
मंत्रालय ने शनिवार, 14 मार्च 2026 को जारी अपने बयान में कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम की धारा 14 के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए वांगचुक की हिरासत रद्द करने का फैसला किया है।
उद्देश्य: मंत्रालय के अनुसार, यह निर्णय लद्दाख में “शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल” बनाने और सभी हितधारकों के साथ “सार्थक संवाद” की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए लिया गया है।
तर्क: सरकार ने यह भी नोट किया कि वांगचुक पहले ही अपनी निवारक हिरासत (Preventive Detention) की अधिकतम अवधि का लगभग आधा समय जेल में बिता चुके हैं।
2. जोधपुर जेल से रिहाई
जोधपुर के रातानाडा थाना प्रभारी (SHO) के अनुसार, गृह मंत्रालय का आदेश मिलने के बाद शनिवार दोपहर लगभग 1:30 बजे सोनम वांगचुक को जोधपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया। उनकी पत्नी, डॉ. गीतांजलि एंग्मो, औपचारिकताएं पूरी करने के लिए वहां मौजूद थीं।
3. हिरासत का घटनाक्रम
वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को लेह जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर हिरासत में लिया गया था।
कारण:
यह कार्रवाई 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसक झड़पों के बाद की गई थी, जिसमें लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करने की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव हुआ था। सरकार ने वांगचुक पर प्रदर्शनकारियों को उकसाने का आरोप लगाया था।
स्थानांतरण:
शुरुआत में लद्दाख में रखे जाने के बाद उन्हें सुरक्षा कारणों से राजस्थान की जोधपुर जेल भेज दिया गया था।
4. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का दबाव
वांगचुक की रिहाई ऐसे समय में हुई है जब सुप्रीम कोर्ट उनकी हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था। हालिया सुनवाई में जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने सरकार द्वारा पेश किए गए वांगचुक के भाषणों के अनुवाद और सबूतों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई 17 मार्च को तय की थी, लेकिन केंद्र ने उससे पहले ही हिरासत खत्म करने का कदम उठाया।
5. लद्दाख में प्रतिक्रिया
लद्दाख के प्रमुख संगठनों—लेह अपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (KDA)—ने इस फैसले का स्वागत किया है। हालांकि, इन संगठनों ने स्पष्ट किया है कि लद्दाख की संवैधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर उनका संघर्ष जारी रहेगा।
Discover more from In Breaking
Subscribe to get the latest posts sent to your email.

