असम के कछार जिले में पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की प्रतिमा को तोड़े जाने की घटना से राज्य में राजनीतिक तनाव काफी बढ़ गया है। यह घटना 23-24 फरवरी 2026 की दरम्यानी रात को हुई है।
यह घटना कछार जिले के पैलापूल (Pailapool) बाजार क्षेत्र की है, जो लखीपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। अज्ञात बदमाशों ने पंडित नेहरू की 10 फीट ऊंची प्रतिमा को उखाड़ने और तोड़ने के लिए एक जेसीबी (Excavator/Bulldozer) का इस्तेमाल किया।
शुरुआत में पुलिस और प्रशासन की ओर से कुछ दावों में कहा गया कि मूर्ति खुद गिर गई होगी,
असम के कछार जिले में पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की प्रतिमा को तोड़े जाने की घटना से राज्य में राजनीतिक तनाव काफी बढ़ गया है। यह घटना 23-24 फरवरी 2026 की दरम्यानी रात को हुई है।
यह घटना कछार जिले के पैलापूल (Pailapool) बाजार क्षेत्र की है, जो लखीपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। अज्ञात बदमाशों ने पंडित नेहरू की 10 फीट ऊंची प्रतिमा को उखाड़ने और तोड़ने के लिए एक जेसीबी (Excavator/Bulldozer) का इस्तेमाल किया।
शुरुआत में पुलिस और प्रशासन की ओर से कुछ दावों में कहा गया कि मूर्ति खुद गिर गई होगी, लेकिन पास के CCTV फुटेज ने सच्चाई साफ कर दी। फुटेज में साफ दिखा कि रात के अंधेरे में एक बुलडोजर के जरिए प्रतिमा को गिराया गया।
जब्ती और गिरफ्तारी: पुलिस ने घटना में इस्तेमाल की गई जेसीबी मशीन को जब्त कर लिया है। अब तक एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है, जबकि मशीन का चालक और अन्य मुख्य आरोपी फिलहाल फरार हैं।
जांच: लखीपुर पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है और डिजिटल सबूतों के आधार पर अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।
कांग्रेस का आरोप: असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने इसे “कायराना कृत्य” बताया है। कांग्रेस का आरोप है कि यह आगामी विधानसभा चुनावों से पहले तनाव पैदा करने की एक “सोची-समझी साजिश” है। उन्होंने राज्य सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए इसे नेहरू की विरासत का अपमान बताया।
बीजेपी पर निशाना: कांग्रेस नेताओं ने ध्यान दिलाया कि यह क्षेत्र बीजेपी विधायक कौशिक राय के निर्वाचन क्षेत्र में आता है, फिर भी सरकार ने इस पर तुरंत कोई कड़ी प्रतिक्रिया नहीं दी।
ऐतिहासिक संदर्भ: स्थानीय लोगों के अनुसार, यह प्रतिमा 1990 के दशक में लगाई गई थी और पैलापूल क्षेत्र में नेहरू के नाम पर 1953 से एक स्कूल और 1965 से एक कॉलेज भी संचालित है।
पंडित नेहरू की प्रतिमा तोड़े जाने की घटना पर कांग्रेस ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने इसे केवल एक प्रतिमा का अपमान नहीं, बल्कि “आधुनिक भारत की नींव” पर हमला बताया है।
1. गौरव गोगोई (असम कांग्रेस अध्यक्ष) का कड़ा रुख
असम कांग्रेस के अध्यक्ष और सांसद गौरव गोगोई ने इस घटना को “कायरतापूर्ण और शर्मनाक” करार दिया है। उन्होंने कहा कि ये विरासत का अपमान है, यह कृत्य एक महान स्वतंत्रता सेनानी और नेता की विरासत को अपमानित करने के लिए किया गया है।
लोकतंत्र पर हमला: उन्होंने कहा कि भले ही राजनीतिक विचारधाराएं अलग हों, लेकिन इस तरह अनैतिक रूप से लोकतांत्रिक इतिहास को मिटाने की कोशिश स्वीकार्य नहीं है।
सरकार की चुप्पी पर सवाल: गोगोई ने इस मामले पर राज्य सरकार की “चिंताजनक चुप्पी” की आलोचना की और इसे बीजेपी के शासनकाल में एक “कलंक” बताया।
2. स्थानीय विधायक और “सीएम के करीबी” पर निशाना
कांग्रेस ने सोशल मीडिया (X) पर सीधे तौर पर सवाल उठाया कि जिस इलाके (लखीपुर) में यह घटना हुई, वहां के विधायक कौशिक राय (जो मुख्यमंत्री के करीबी माने जाते हैं) इस पर चुप क्यों हैं?
कांग्रेस ने पूछा— “यह जेसीबी (Excavator) किसकी है? और किसके इशारे पर यह तोड़फोड़ की गई?”
3. सुष्मिता देव (सांसद) की मांग
राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने कछार के जिला उपायुक्त (DC) को पत्र लिखकर इसे “राष्ट्रीय शर्म” बताया है। उन्होंने दोषियों की तत्काल पहचान कर उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
4. चुनावी साजिश का आरोप
सिल्चर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सजल अचरजी ने आरोप लगाया कि यह एक “सुनियोजित हमला” है। उनके अनुसार, मार्च-अप्रैल 2026 में होने वाले असम विधानसभा चुनाव से पहले इलाके में सांप्रदायिक और राजनीतिक तनाव पैदा करने के लिए जानबूझकर यह हरकत की गई है।
5. विरोध प्रदर्शन और FIR
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने लखीपुर थाने में FIR दर्ज कराई है और चेतावनी दी है कि अगर दोषियों की जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई और प्रतिमा को उसी स्थान पर ससम्मान फिर से स्थापित नहीं किया गया, तो पार्टी पूरे राज्य में उग्र आंदोलन करेगी।
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