अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उनके दूसरे कार्यकाल का सबसे बड़ा कानूनी और आर्थिक झटका दिया है। अदालत ने ट्रंप द्वारा दुनियाभर के देशों पर लगाए गए ग्लोबल टैरिफ (आयात शुल्क) को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है। इसे ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति की हार के रूप में देखा जा रहा है।
इस फैसले के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
सुप्रीम कोर्ट का फैसला (6-3 का बहुमत)
अधिकारों का उल्लंघन: चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स की अगुवाई वाली बेंच ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उनके दूसरे कार्यकाल का सबसे बड़ा कानूनी और आर्थिक झटका दिया है। अदालत ने ट्रंप द्वारा दुनियाभर के देशों पर लगाए गए ग्लोबल टैरिफ (आयात शुल्क) को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है। इसे ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति की हार के रूप में देखा जा रहा है।
इस फैसले के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
सुप्रीम कोर्ट का फैसला (6-3 का बहुमत)
अधिकारों का उल्लंघन: चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स की अगुवाई वाली बेंच ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ लगाने के लिए अपनी कानूनी शक्तियों का दुरुपयोग किया।
संसद (Congress) की शक्ति: अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान के तहत टैक्स या टैरिफ लगाने का अधिकार केवल अमेरिकी संसद (Congress) के पास है। राष्ट्रपति ‘नेशनल इमरजेंसी’ के नाम पर इस अधिकार को अपने हाथ में नहीं ले सकते।
IEEPA कानून की व्याख्या: ट्रंप ने 1977 के ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ (IEEPA) का हवाला देकर ये टैरिफ लगाए थे। कोर्ट ने कहा कि यह कानून राष्ट्रपति को अनिश्चितकाल के लिए व्यापक टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं देता।
फैसले का असर और प्रतिक्रिया
अरबों डॉलर का रिफंड: इस फैसले के बाद अमेरिकी सरकार को उन कंपनियों और देशों को अरबों डॉलर (लगभग $150-175 बिलियन) वापस करने पड़ सकते हैं, जिनसे अब तक टैरिफ वसूला गया है।
ट्रंप की प्रतिक्रिया: राष्ट्रपति ट्रंप ने इस फैसले को “अपमानजनक” (A Disgrace) बताया है। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा और दूसरे देश फिर से अमेरिका का फायदा उठाएंगे।
भारतीय संदर्भ: भारत के लिए यह राहत की खबर हो सकती है, क्योंकि ट्रंप प्रशासन ने भारतीय सामानों पर भी भारी टैरिफ लगाए थे। हालांकि, हाल ही में 3 फरवरी को दोनों देशों के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौता हुआ था, जिससे तनाव कुछ कम हुआ था।
आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के इस झटके के बावजूद ट्रंप प्रशासन दूसरे कानूनों (जैसे Section 232 या 301) के तहत नए टैरिफ लगाने की कोशिश कर सकता है, लेकिन अब उन्हें हर कदम पर कड़े कानूनी मापदंडों का सामना करना होगा।
Discover more from In Breaking
Subscribe to get the latest posts sent to your email.

