ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई की मृत्यु पर भारत में राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच तीव्र और विविध प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहाँ विपक्ष ने इसे “कायराना हमला” बताया है, वहीं केंद्र सरकार ने बेहद संतुलित और कूटनीतिक रुख अपनाया है।
भारत में प्रमुख प्रतिक्रियाएं इस प्रकार हैं:
1. केंद्र सरकार का रुख (विदेश मंत्रालय)
भारत सरकार ने इस मामले पर ‘सधी हुई चुप्पी’ (Studied Silence) बनाए रखी है, लेकिन विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर क्षेत्र में
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई की मृत्यु पर भारत में राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच तीव्र और विविध प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहाँ विपक्ष ने इसे “कायराना हमला” बताया है, वहीं केंद्र सरकार ने बेहद संतुलित और कूटनीतिक रुख अपनाया है।
भारत में प्रमुख प्रतिक्रियाएं इस प्रकार हैं:
1. केंद्र सरकार का रुख (विदेश मंत्रालय)
भारत सरकार ने इस मामले पर ‘सधी हुई चुप्पी’ (Studied Silence) बनाए रखी है, लेकिन विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर क्षेत्र में बढ़ती हिंसा पर “गहरी चिंता” व्यक्त की है।
संयम की अपील: भारत ने सभी पक्षों से अत्यधिक संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है।
कूटनीति: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरानी और इजरायली समकक्षों से बात कर तनाव कम करने और बातचीत का रास्ता अपनाने पर जोर दिया है।
नागरिक सहायता: सरकार ने पश्चिम एशिया में फंसे भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी की है और भारत में मौजूद उन विदेशी नागरिकों की वीज़ा अवधि बढ़ाने में मदद की पेशकश की है जिनकी यात्रा इस युद्ध के कारण बाधित हुई है।
2. विपक्षी दलों की तीखी प्रतिक्रिया
विपक्षी नेताओं ने इजरायल और अमेरिका के इस कदम की कड़ी निंदा की है
प्रियंका गांधी वाड्रा (कांग्रेस): उन्होंने इसे एक संप्रभु राष्ट्र के नेता की “लक्षित हत्या” (Targeted Assassination) करार देते हुए “घृणित” बताया। उन्होंने महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि “आंख के बदले आंख पूरी दुनिया को अंधा बना देती है।”
जयराम रमेश (कांग्रेस): उन्होंने पीएम मोदी की हालिया इजरायल यात्रा पर सवाल उठाते हुए सरकार की विदेश नीति को “विश्वासघात” बताया।
असदुद्दीन ओवैसी (AIMIM): उन्होंने इसे एक “अनैतिक और अवैध कृत्य” कहा और भारत सरकार से युद्ध रोकने में भूमिका निभाने की अपील की।
तेजस्वी यादव (RJD): उन्होंने कहा कि “भारत ने अपना एक सच्चा दोस्त खो दिया है।”
3. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में प्रभाव
ख़ामेनेई की मौत का सबसे गहरा असर कश्मीर और कारगिल में देखा गया
उमर अब्दुल्ला (मुख्यमंत्री): उन्होंने घटना पर चिंता जताते हुए लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की और प्रशासन को निर्देश दिया कि शोक मना रहे लोगों के साथ संयम बरतें।
मेहबूबा मुफ्ती (PDP): उन्होंने इसे “मुस्लिम उम्माह” (मुस्लिम जगत) के लिए एक बड़ा घाव बताया और घाटी में विरोध प्रदर्शनों का समर्थन किया।
विरोध प्रदर्शन: श्रीनगर के लाल चौक, बडगाम और कारगिल में हजारों लोग सड़कों पर उतरे, काले झंडे लहराए और अमेरिका-इजरायल के खिलाफ नारेबाजी की।
4. अन्य महत्वपूर्ण प्रतिक्रियाएं
ईरानी दूतावास (दिल्ली): दूतावास ने दुनिया भर की सरकारों से इस “जघन्य अपराध” की निंदा करने और चुप न रहने की अपील की है।
धार्मिक संगठन: कई मुस्लिम संगठनों ने भारत सरकार से मांग की है कि वह इजरायल पर दबाव बनाए ताकि क्षेत्रीय युद्ध को टाला जा सके।
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