नई दिल्ली। चैक बाउंस मामले में बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को बुधवार बड़ी राहत मिली है। दिल्ली हाई कोर्ट ने 9 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में उनकी जेल की सजा के निलंबन (Suspension of Sentence) को 1 अप्रैल 2026 तक बढ़ा दिया है। अब राजपाल यादव को 1 अप्रेल तक जेल जाने से मुक्ति मिल गई है।
बुधवार को सुनवाई के दौरान न्यायालय का रुख थोड़ा नरम दिखाई दिया। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि चूंकि राजपाल यादव ने शिकायतकर्ता कंपनी को एक ‘बड़ी राशि’ (Substantial Payment) का भुगतान कर दिया है, इसलिए
नई दिल्ली। चैक बाउंस मामले में बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को बुधवार बड़ी राहत मिली है। दिल्ली हाई कोर्ट ने 9 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में उनकी जेल की सजा के निलंबन (Suspension of Sentence) को 1 अप्रैल 2026 तक बढ़ा दिया है। अब राजपाल यादव को 1 अप्रेल तक जेल जाने से मुक्ति मिल गई है।
बुधवार को सुनवाई के दौरान न्यायालय का रुख थोड़ा नरम दिखाई दिया। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि चूंकि राजपाल यादव ने शिकायतकर्ता कंपनी को एक ‘बड़ी राशि’ (Substantial Payment) का भुगतान कर दिया है, इसलिए उन्हें फिलहाल वापस जेल भेजने की आवश्यकता नहीं है।
इतना ही नहीं कोर्ट ने नरम रुख दिखाते हुए टिप्पणी की, “वह (राजपाल यादव) कहीं भाग नहीं रहे हैं, वह अदालत में मौजूद हैं और जेल भी जा चुके हैं। चेक बाउंस मामले में आप और क्या चाहते हैं? यदि पैसा आना है, तो वह आ जाएगा।”
इससे पहले राजपाल यादव के वकील ने कोर्ट को सूचित किया कि अब तक कुल ₹4.25 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। सुनवाई के दौरान ही अभिनेता की ओर से ₹25 लाख का एक और डिमांड ड्राफ्ट (DD) पेश किया गया। कोर्ट ने साफ किया कि राजपाल यादव के पास दो विकल्प हैं: या तो वे शेष राशि का भुगतान कर समझौता करें या फिर मामले को मेरिट (कानूनी आधार) पर लड़ें।
हाई कोर्ट अब इस मामले की अंतिम सुनवाई 1 अप्रैल 2026 को करेगा। तब तक राजपाल यादव जेल से बाहर रहेंगे, बशर्ते वे कोर्ट की शर्तों का पालन करते रहें।
क्या है पूरा मामला:
यह विवाद साल 2010 से चला आ रहा है, जब राजपाल यादव ने अपनी निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ (2012) के लिए ‘मैसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स’ से कर्ज लिया था। फिल्म फ्लॉप होने के कारण वह कर्ज नहीं चुका पाए, जिसके बाद यह चेक बाउंस का मामला दर्ज हुआ। इस साल 5 फरवरी 2026 को उन्हें सरेंडर करना पड़ा था और 10 दिन तिहाड़ जेल में बिताने के बाद 16 फरवरी को उन्हें अंतरिम राहत मिली थी।
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