अलीगढ। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्य तिथि के अवसर पर अलीगढ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की 78 वे पुण्यतिथि पर उन्हें चित्र पर फूल अर्पित कर उंन्हे भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए उनका स्मरण किया।
अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश महासचिव सागर सिंह तोमर ने बताया 30 जनवरी भारत ही नहीं समूची मानवता के लिए एक बहुत ही दुखद दिन है। यह सपनों के टूटने और आशाओं के बिखरने का दिन है। आज के हो दिन सन 1948 में शाम 5 बजकर 17 मिनट पर चली तीन गोलियाँ ने न केवल एक शरीर को नहीं
अलीगढ। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्य तिथि के अवसर पर अलीगढ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की 78 वे पुण्यतिथि पर उन्हें चित्र पर फूल अर्पित कर उंन्हे भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए उनका स्मरण किया।
अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश महासचिव सागर सिंह तोमर ने बताया 30 जनवरी भारत ही नहीं समूची मानवता के लिए एक बहुत ही दुखद दिन है। यह सपनों के टूटने और आशाओं के बिखरने का दिन है। आज के हो दिन सन 1948 में शाम 5 बजकर 17 मिनट पर चली तीन गोलियाँ ने न केवल एक शरीर को नहीं भेदा अपितु भारत की नैतिक चेतना, मनुष्यता की उम्मीद और भविष्य की संभावनाओं को घायल कर दिया। उस क्षण ऐसा लगा मानो इतिहास रुक गया हो, समय थम गया हो, और संसार ने अपनी दिशा खो दी हो गांधी जी तो नहीं लौटे और 31 जनवरी की सुबह सूरज भी उगा। अर्थी से निकलकर भारत आगे भी चला गांधी का मतलब भी यही है अंधकार से आगे निकलकर चलना। मृत्यु में से जीवन को खोज निकालना। 30 जनवरी 1948 को जो हुआ हम सब भारतवासी उसे रोक नहीं सके।
जिला महामंत्री कैलाश गौतम ने कहा 30 जनवरी की शाम जब तीन गोलियां चलीं तो वे केवल धातु के टुकड़े नहीं थे, उन्होंने एक महामानव की धवल धोती पर रक्त के ऐसे धब्बे छोड़ दिए जो कभी नहीं धुल सकते । उस रक्त रंजित तहों में टिक-टिक करती इंगरसोल घड़ी ठहर गई—मानो समय ने भी आगे बढ़ने से इनकार कर दिया हो। बापू का वह चश्मा, जो भावी भारत के सुनहरे भविष्य को देखने का माध्यम था, छिटककर दूर जा गिरा। दृश्य ऐसा था मानो सत्य और अहिंसा का मार्ग अचानक धुंधला गया हो।
यहां उपस्थित अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश महासचिव सागर सिंह तोमर, जिला महामंत्री कैलाश गौतम, कार्यालय प्रभारी पुरुषोत्तम दास, प्रमोद शर्मा, गुड्डू डागा, भूप सिंह, रविंद्र कुमार बघेल, विनय कुमार, रोहित जाटव तथा अमर सिंह जाटव आदि लोग उपस्थित रहे।
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