नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार चीनी सीसीटीवी कैमरों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से होने वाली विदेशी निगरानी के खतरों को छिपा रही है।
उन्होंने दावा किया कि यह लापरवाही नागरिकों की सुरक्षा के साथ समझौता कर सकती है।फेसबुक पर एक पोस्ट साझा करते हुए गांधी ने कहा कि सरकार अपनी “विफलताओं को छिपाने” और लोगों को “अंधेरे में रखने” की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे भारत को अनभिज्ञ रखने की एक “जानबूझकर रची गई साजिश” करार दिया।
निगरानी के खतरों पर गंभीर आरोप:
राहुल गांधी ने दावा किया कि सार्वजनिक उपयोग में चीनी मूल के सीसीटीवी कैमरों पर प्रतिबंध के बावजूद, ऐसे उपकरण अभी भी सरकारी इमारतों के भीतर लगाए जा रहे हैं। उनके मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:नाम बदलकर वापसी: प्रतिबंधित चीनी ऐप्स नए नामों के साथ फिर से सामने आ रहे हैं।
डाटा प्रोसेसिंग:
विदेशी एआई (AI) प्लेटफॉर्म संवेदनशील डेटा को प्रोसेस कर रहे हैं।सरकार की चुप्पी: इन गंभीर विषयों पर सरकार के पास कहने के लिए कुछ भी नहीं है।
गांधी ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे को लोकसभा में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से एक अतारांकित प्रश्न (Unstarred Question) के माध्यम से उठाया था। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार के जवाब में प्रमुख चिंताओं पर कोई विशिष्ट जानकारी नहीं दी गई।
उन्होंने सरकार से कड़े सवाल पूछे:
- हमारे कैमरे किन देशों से आए हैं?
- सुरक्षा की दृष्टि से कितने प्रमाणित हैं?
- कौन से विदेशी एआई प्लेटफॉर्म सरकारी डेटा प्रोसेस कर रहे हैं?
मंत्रालय के जवाब में न कोई आंकड़ा था, न कोई स्पष्ट उत्तर—यहाँ तक कि एक भी प्लेटफॉर्म का नाम नहीं बताया गया।”
उन्होंने आगे कहा कि लगभग 10 लाख चीनी कैमरों से जुड़े जोखिमों को पहले स्वीकार किए जाने के बावजूद, सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि मौजूदा सिस्टम सुरक्षित हैं या नहीं।
सरकार का पक्षराहुल गांधी के सवाल का जवाब देते हुए राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि सरकार साइबर सुरक्षा जोखिमों के प्रति सचेत है और डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। सरकार द्वारा गिनाए गए मुख्य उपाय इस प्रकार हैं:
| उपाय | विवरण |
| भरोसेमंद स्रोत | 2021 में ‘नेशनल सिक्योरिटी डायरेक्टिव ऑन ट्रस्टेड सोर्सेज’ लागू किया गया ताकि उपकरण विश्वसनीय विक्रेताओं से ही लिए जाएं। |
| कानूनी ढांचा | दूरसंचार अधिनियम 2023 और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2022 के माध्यम से नेटवर्क को सुरक्षित किया गया। |
| मानक वृद्धि | सीसीटीवी सिस्टम के मानकों को बढ़ाने और टेलीकॉम नेटवर्क को सुरक्षित करने पर निरंतर कार्य। |
पारदर्शिता पर सवाल:
राहुल गांधी ने अंत में कहा कि विस्तृत खुलासे की कमी पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने चेतावनी दी कि विदेशी निगरानी की वास्तविकता को छिपाकर सरकार हर नागरिक की सुरक्षा को खतरे में डाल रही है।
यह मुद्दा डेटा सुरक्षा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और महत्वपूर्ण प्रणालियों में विदेशी तकनीक के उपयोग पर चल रही राजनीतिक बहस को और तेज करता नजर आ रहा है।
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